School Holiday – साल 2026 की शुरुआत ने मौसम के लिहाज़ से लोगों की परीक्षा ले ली है। जनवरी और फरवरी में कड़ाके की ठंड, लगातार शीतलहर और घने कोहरे ने आम जनजीवन को प्रभावित किया। सुबह के समय दृश्यता बेहद कम रही और तापमान सामान्य से नीचे दर्ज किया गया। ऐसे हालात में सबसे अधिक परेशानी छोटे बच्चों और स्कूल जाने वाले छात्रों को झेलनी पड़ी।
ठंड का असर खासतौर पर नर्सरी से आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों पर अधिक दिखाई दिया। सुबह-सुबह स्कूल बस का इंतजार करना, ठंडी हवाओं में बाहर खड़े रहना और घंटों कक्षा में बैठना उनके स्वास्थ्य के लिए चुनौती बन गया। कई इलाकों में सर्दी, खांसी, बुखार और वायरल संक्रमण के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई। चिकित्सकों ने भी बच्चों को अत्यधिक ठंड से बचाने की सलाह दी।
इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए कई राज्यों और जिलों के प्रशासन ने 28 फरवरी से 5 मार्च तक स्कूलों में अवकाश घोषित करने का निर्णय लिया। यह कदम एहतियातन उठाया गया ताकि बच्चों को स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों से बचाया जा सके। अभिभावकों ने भी इस फैसले का स्वागत किया और इसे समयानुकूल बताया।
मौसम विभाग की चेतावनियों ने प्रशासन की चिंता और बढ़ा दी थी। कई क्षेत्रों में शीतलहर के साथ-साथ घने कोहरे का अलर्ट जारी किया गया था। सुबह के समय दृश्यता कम होने से सड़क दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया था। ऐसे में बच्चों का रोज स्कूल आना-जाना सुरक्षित नहीं माना गया।
कुछ जिलों में हल्की बारिश और तेज सर्द हवाओं की भी संभावना जताई गई थी, जिससे ठंड और बढ़ सकती थी। लगातार गिरते तापमान ने लोगों को घरों में रहने पर मजबूर कर दिया। प्रशासन ने हालात की समीक्षा के बाद शिक्षा विभाग के साथ समन्वय करते हुए स्कूल बंद रखने का फैसला लिया। यह निर्णय बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने का प्रतीक है।
इस बार बढ़ी हुई छुट्टियां होली के आसपास पड़ रही हैं, जिससे बच्चों की खुशी दोगुनी हो गई है। होली रंगों, उत्साह और पारिवारिक मेलजोल का पर्व है। जब त्योहार और अवकाश एक साथ मिलते हैं, तो बच्चों को पढ़ाई के दबाव से राहत मिलती है। वे पूरे उत्साह के साथ त्योहार की तैयारी और आनंद ले सकते हैं।
होली 2026 इस बार ठंड के मौसम में ही मनाई जा रही है। यदि बच्चे स्वस्थ रहें, तभी वे त्योहार का सही आनंद उठा सकते हैं। अतिरिक्त छुट्टियों से उन्हें पर्याप्त आराम, नींद और परिवार के साथ समय बिताने का अवसर मिलेगा। मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए यह अवकाश लाभकारी साबित हो सकता है।
हालांकि स्कूल बंद हैं, लेकिन पढ़ाई पूरी तरह रुकी नहीं है। कई विद्यालयों ने ऑनलाइन कक्षाओं, डिजिटल असाइनमेंट और व्हाट्सएप समूहों के माध्यम से पढ़ाई जारी रखने की व्यवस्था की है। इससे छात्रों की पढ़ाई की लय बनी रहती है और पाठ्यक्रम से जुड़ाव बना रहता है।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि लंबी छुट्टियों के दौरान हल्की-फुल्की पढ़ाई जरूरी होती है। नियमित रिवीजन, प्रोजेक्ट वर्क और स्वाध्याय बच्चों को अनुशासित बनाए रखते हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म ने ऐसी परिस्थितियों में शिक्षा को निरंतर बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई है। भविष्य में भी इस तरह की व्यवस्थाएं उपयोगी साबित हो सकती हैं।
अभिभावकों ने प्रशासन के फैसले को सकारात्मक कदम बताया है। उनका कहना है कि बच्चों की सेहत सर्वोपरि है और कठोर मौसम में उन्हें घर पर रखना ही समझदारी है। कई माता-पिता ने यह भी कहा कि सुबह की ठंड और कोहरे के कारण वे पहले से ही चिंतित थे। अवकाश से उनकी चिंता कुछ हद तक कम हुई है।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण रही। वहां कई स्कूलों में पर्याप्त हीटिंग व्यवस्था नहीं होती। बच्चे खुले मैदान में प्रार्थना सभा में खड़े रहते हैं, जिससे ठंड का प्रभाव अधिक होता है। छुट्टियों के कारण ऐसे विद्यार्थियों को राहत मिली है और बीमारी का खतरा भी कम हुआ है।
शहरी इलाकों में भी ठंड का असर कम नहीं था। घने कोहरे के कारण ट्रैफिक धीमा हो गया और कई जगह लंबा जाम लगा। ऐसे में स्कूल बसों की आवाजाही भी प्रभावित हुई। प्रशासन ने संभावित दुर्घटनाओं को ध्यान में रखते हुए सावधानी बरतना ही उचित समझा।
विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम के पैटर्न में बदलाव देखा जा रहा है। कभी अत्यधिक गर्मी तो कभी असामान्य ठंड लोगों को प्रभावित कर रही है। ऐसे हालात में प्रशासन को समय-समय पर त्वरित निर्णय लेने पड़ते हैं। स्कूलों की छुट्टियां भी उसी का एक हिस्सा हैं।
बच्चों के स्वास्थ्य पर ठंड का प्रभाव केवल शारीरिक ही नहीं, मानसिक भी होता है। लगातार असुविधा और बीमारी के कारण उनका मनोबल गिर सकता है। अतिरिक्त अवकाश से उन्हें मानसिक आराम मिलता है और वे तरोताजा महसूस करते हैं। परिवार के साथ समय बिताना उनके भावनात्मक विकास में सहायक होता है।
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि आगे का निर्णय मौसम की स्थिति पर निर्भर करेगा। यदि तापमान सामान्य स्तर पर लौटता है और कोहरा कम होता है, तो निर्धारित तिथि के बाद स्कूल दोबारा खोले जा सकते हैं। लेकिन यदि शीतलहर जारी रहती है, तो छुट्टियों को बढ़ाने पर विचार किया जा सकता है।
अभिभावकों और छात्रों को सलाह दी गई है कि वे केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें। सोशल मीडिया पर फैलने वाली अपुष्ट खबरों से बचना जरूरी है। किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए स्कूल या शिक्षा विभाग की वेबसाइट पर नजर रखना बेहतर होगा।
इस पूरी स्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना सबसे महत्वपूर्ण है। पढ़ाई जरूरी है, लेकिन जीवन और स्वास्थ्य उससे कहीं अधिक मूल्यवान हैं। समयानुकूल निर्णय लेकर प्रशासन ने जिम्मेदारी का परिचय दिया है।
अंततः यह कहा जा सकता है कि 2026 की सर्दी ने सबको सावधान कर दिया है। बढ़ी हुई स्कूल छुट्टियां केवल अवकाश नहीं, बल्कि एक सुरक्षात्मक कदम हैं। उम्मीद है कि मौसम जल्द सामान्य होगा और बच्चे सुरक्षित वातावरण में अपनी पढ़ाई फिर से शुरू कर सकेंगे। तब तक यह अवकाश उनके लिए आराम, उत्सव और परिवार के साथ सुखद समय का अवसर बना रहेगा।








